सकारात्मक दृष्टिकोण के रचनाकार राजीव राय

जीवन में कड़वे और मीठे अनुभवों से सभी गुज़रते हैं, मगर उन अनुभवों से सीख लेकर उन्हें शब्दों के रस में पिरोकर समाज को लौटाने का काम एक रचनाकार ही कर सकता है और राजीव राय इस काम को बहुत ख़ूबसूरती से पूरा कर रहे हैं।


राजीव राय बेहद खुले दिमाग के विद्वान व्यक्ति हैं। वे मुख्य रूप से एक शायर के रूप में जाने जाते हैं। उनका गज़ल संग्रह 'जज़्बात' काफी चर्चित रहा है। वे टी-सीरीज के भजन एल्बम 'तूने अब तक समय गंवाया' के लिए भी लेखन कार्य कर चुके हैं। इसके साथ ही उनके लिखे भजनों से सजा एक अन्य एल्बम 'काहे ढूंढे उसको बन्दे' भी शीघ्र रिलीज होने वाला है।


श्री राय सजग व्यवहारविद भी हैं। उनके भीतर मानव व्यवहार का विवेचन करने की अद्भुत क्षमता है। वे व्यक्ति और उससे जुड़ी घटनाओं को बेहद सूक्ष्मता से एनालाइज करते हैं और उसके सार को निचोड़ कर अपने मस्तिष्‍क में संरक्षित कर लेते है। मानव व्यवहार पर लिखी उनकी पुस्तक 'सफल कैसे हों' बेहद सफल रही है और उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान से पुरस्कृत हो चुकी है। इसी विषय पर उनकी एक अन्य पुस्तक 'विचारों के मोती' भी शीघ्र प्रकाशित होने वाली है।


राजीव राय जी को उनके साहित्यिक अवदानों के लिए उ0प्र0 हिन्दी संस्थान से 'मदन मोहन मालवीय पुरस्कार', उ0प्र0 राज्य कर्मचारी साहित्य संस्थान से 'डॉ0 शिव मंगल सिंह सुमन पुरस्कार' एवं सी.एम.एस. लखनऊ से 'फेलो ऑफ सी0एम0एस0 अवार्ड' भी प्राप्त हो चुके हैं।

मैं उन्हें भविष्‍य के लिए अपनी शुभकामनाएं प्रेषित करता हूं और आशा करता हूं कि उनकी कलम का जादू यूं ही चलता रहेगा और हमें भविष्‍य में भी वे अपनी सर्जना से यूंही लाभान्वित करते रहेंगे।

मैं राजीव राय द्वारा लखनऊ पर लिखी उनकी चार पंक्तियों के साथ अपनी बात समाप्त करता हूँ -

तहज़ीब 'ओ' तमद्दुन का ये शहर पुराना है
इस शहर 'ए' लखनऊ का अपना ये ख़ज़ाना है
क़ायम रहे हमेशा यहाँ अम्न 'ओ' मोहब्बत
इस शहर के लोगों को ये फर्ज़ निभाना है

डॉ ज़ाकिर अली 'रजनीश'
साहित्यकार

Rajiv Roy: A writer and poet from Lucknow

Rajiv Roy was born in Lucknow - 'The city of tahzeeb' on 7th of January, 1956. He is a Commerce graduate from Lucknow University, 1975. He took voluntary retirement from government job to service literature; poem and prose both. He has published following famous books -

1. Saphal Kaise Ho - for this book he received award from Hindi Sansthan
2. Jazbat - for this book he received award from Sahitya Sansthan
3. Vicharon ke Moti - will available shortly in your nearby market

He has released following records/ music albums -

1. Tune Ab Tak Samay Gavaya (Available on T-series)
2. Kahe Dundhe Usko Bande (Artist: Anup Jalota; Available very soon on Affection Music Record)

He is a regular member of Film Writers Association, Mumbai. Apart from that he is doing freelance writing for various known magazines and has been performed in lots of radio programmes on regular basis.